भारत देश को त्यौहारों का देश कहा जाता है। इन त्यौहारों के पीछे महज परम्परा या रूढ़िवादी धारणाएं नहीं होती बल्कि प्रत्येक त्यौहार के पीछे धर्म से सम्बन्धित ज्ञान-विज्ञान, स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद से जुड़ी बातें भी होती हैं। हिंदू धर्म में पौराणिक ग्रंथों और शास्त्रादि के अनुसार हर महीने कोई न कोई उपवास, कोई न कोई पर्व, त्यौहार या संस्कार आदि आता ही है। भारत में सैकड़ों त्यौहार मनाए जाते हैं, जैसे दीपावली, होली, नवरात्रि, दशहरा, महाशिवरात्री, गणेश चतुर्थी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, करवा चैथ, छठ पूजा, वसंत पंचमी, मकर संक्रांति, दुर्गा पूजा, भाईदूज, उगादि, ओणम, पोंगल, लोहड़ी, हनुमान जयंती, गोवर्धन पूजा, काली पूजा, विष्णु पूजा, नरक चतुर्थी, रथ यात्रा, गौरी उत्सव, तीज, थाईपुसम, कुंभ, ब्रह्मोत्सव, एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या आदि। इनमें से कुछ त्यौहार है, कुछ पर्व, कुछ व्रत, पूजा और उपवास। सभी में फर्क करना चाहिए।

एकादशी व्रत : एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले महिला/पुरुष को दशमी के दिन से कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना पड़ेगा। इस दिन निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि ‘आज मैं चोर, पाखंडी और दुराचारी मनुष्यों से बात नहीं करूँगा और न ही किसी का दिल दुखाऊँगा। रात्रि को जागरण कर कीर्तन करूँगा।’ ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ इस द्वादश मंत्र का जाप करें। यदि भूलवश किसी निंदक से बात कर भी ली तो भगवान सूर्यनारायण के दर्शन कर धूप-दीप से श्री हरि की पूजा कर क्षमा मांग लेना चाहिए।

एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए। यथाशक्ति दान करना चाहिए किन्तु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि कदापि ग्रहण न करें। दशमी के साथ मिली हुई एकादशी वृद्ध मानी जाती है। वैष्णवों को योग्य द्वादशी मिली हुई एकादशी का व्रत करना चाहिए। फलाहारी व्रती को अमृत फलों का सेवन करना चाहिए। प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर ग्रहण करना चाहिए। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, दक्षिणा देना चाहिए।

भारत में मनाए जाने वाले कुछ प्रमुख त्यौहार :

1. हिन्दू नववर्ष/गुड़ी पड़वा: भारतीय पंचांग में नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ माना जाता है। कनिष्क शासक शालिवाहन ने इसी दिन मिट्टी के सैनिकों की सेना से शकों को पराजित किया। इस विजय के प्रतीक रूप में शालिवाहन शक संवत् का प्रारम्भ होता है।

2. शीतला सप्तमी: शीतला माता का व्रत शीतला सप्तमी/अष्टमी को किया जाता है। यह व्रत मुख्यतः चैत्र मास की सप्तमी/अष्टमी को होता हैं और यही तिथि पुण्य मानी गई है। इस व्रत पर एक दिन पूर्व का बनाया हुआ भोजन जैसे- मेवे, मिठाई, पुए ;गुलगुलाद्ध, पूरी दाल-भात आदि किया जाता है इसलिए इसे बसौड़ा भी कहते हैं।

3. गणगौर: गणगौर मूल रूप से राजस्थान एवं मध्यप्रदेश का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार 18 दिनों तक होलिका दहन के दूसरे दिन (दुलहंडी या पड़वा) अर्थात् चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक चलने वाला त्यौहार है। इस दिन कुवांरी लड़कियां एवं विवाहित महिलायें शिव (ईसर जी) और पार्वती (गौरी) की पूजा करती हैं।

4. राम नवमी: यह त्यौहार भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस पर्व के साथ ही माँ दुर्गा के चैत्र नवरात्रों का समापन भी होता है।

5. महावीर जयन्ती: यह पर्व जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्मदिवस के उपलक्ष में मनाया जाता है। यह जैन धर्म का सबसे प्रमुख पर्व है।

6. हनुमान जयंती: चैत्र माह की पूर्णिमा को भगवान राम की सेवा/सहायता के उद्देश्य से, भगवान शंकर के ग्यारहवें रुद्र अवतार ने, माता अंजना के गर्भ से हनुमान के रूप में जन्म लिया था। इस दिन को हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में इस दिन का सबसे ज्यादा महत्त्व माना जाता है।

7. अक्षय तृतीया: अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।

8. वैशाखी: यह त्यौहार मुख्यतः पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा रबी की फसल पकने की खुशी में ईश्वर को धन्यवाद के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्यौहार हर वर्ष 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है।

9. निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में पानी का पीना वर्जित होता है, इसलिये इसे निर्जला एकादशी कहते है।

10. शिवरात्रि व्रत: शिवरात्रि सनातन धर्म का एक बहुत बड़ा पर्व है। यह समस्त भारत में व्यापक रूप से मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन शिवजी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन लोग कांवड़ में गंगाजल भरकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

11. वट सावित्री व्रत: यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए सौभाग्य को देने वाला और संतान की प्राप्ति में सहायता देने वाला व्रत माना गया है। भारतीय संस्ड्डति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। यह व्रत ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से अमावस्या तक तीन दिनों का होता है।

12. देवशयनि एकादशी: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है।

13. गुरु पूर्णिमा: हिन्दू धर्म में देवी-देवता की तरह गुरु का भी विशेष महत्त्व है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहते हैं। सन्त कबीर दास ने भी गुरु का महत्त्व बताते हुए कहा है –

गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागू पांय।
बलिहारी गुरुदेव को, जिन गोविन्द दियो मिलाय।।

14. हरियाली तीज: यह त्यौहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव और पार्वती के पुर्नमिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस त्यौहार के बारे में मान्यता है कि माता पार्वती की 107 जन्मों की तपस्या के बाद 108वें जन्म में भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

15. नाग पंचमी: सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है।

16. स्वतन्त्रता दिवस: यह भारतदेश का राष्ट्रीय पर्व है। यह प्रतिवर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन भारत देश अंग्रेजों की लम्बी गुलामी से आजाद हुआ था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री द्वारा लालकिला पर तिरंगा फहराया जाता है। तिरंगा फहराने के बाद राष्ट्रगान गया जाता है और 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है। इसके साथ ही भारतीय सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल और एनसीसी कैडेड परेड करते हैं।

17. रक्षाबन्धन: रक्षाबन्धन भाई-बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्यौहार है। श्रावण मास में मनाए जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं।

18. जन्माष्टमी: जन्माष्टमी को भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। श्री कृष्ण देवकी और वसुदेव की आठवीं सन्तान थे। यह त्यौहार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर पूरे दिन व्रत का विधान है। अर्धरात्रि को 12 बजे जन्मोत्सव के साथ व्रत खोलते हैं।

19. गोगा नवमी: भाद्रपद महीने में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन नवमी को गोगा नवमी के रूप में मनाया जाता है। गोगा जी राजस्थान के लोक देवता हैं, जिन्हें ‘जाहरवीर गोगा जी’ के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें हिन्दू और मुसलमान दोनों पूजते हैं। गोगा जी का जन्म संत गोरखनाथ के आशीर्वाद से हुआ था।

20. गणेश चतुर्थी: गणेश चतुर्थी का त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। यह 10 दिनों तक चलने वाला सबसे लंबा त्यौहार है। धर्म ग्रन्थों के अनुसार महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत लिखने का काम गणेश जी ने किया था। यह काम 10 दिनों तक चला था।

21. विश्वकर्मा जयंती: प्रतिवर्ष 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर कल-कारखाने बंद रहते हैं। लोग हर्षोल्लास के साथ विश्वकर्मा की पूजा करते है।

22. श्राद्ध पक्ष: पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का भाव ही श्राद्ध है। भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं। मान्यता है कि किसी की भी मृत्यु इन 16 तिथियों को छोड़कर अन्य किसी दिन नहीं होती है। इस अवधि में हम अपने पितरों तक अपने भाव पहुंचाते हैं।

23. गांधी जयन्ती: भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म दिन 2 अक्टूबर 1869 को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता या बापू के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को ‘विश्व अहिंसा दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

24. नवरात्रि: नवरात्रि का त्यौहार भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है जिसमें ‘नव’ का अर्थ है नौ तथा ‘रात्रि’ अर्थ है रात। नवरात्रि 9 दिनों तक मनाया जाने वाला एक बड़ा त्यौहार है जिसमें बहुत ही श्रद्धा के साथ देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।

25. दशहरा: दशहरा या विजय दशमी हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इसे ‘विजय दशमी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल तृतीया एवं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा।

26. करवा चौथ : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को जो उपवास किया जाता है, उसका सुहागिन स्त्रियों के लिये बहुत अधिक महत्त्व होता है। माना जाता है कि इस दिन यदि सुहागिन स्त्रियां उपवास रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है। करवाचैथ का व्रत सुबह सूर्योदय से पहले ही 4 बजे के बाद शुरु हो जाता है और रात को चंद्रदर्शन के बाद ही व्रत को खोला जाता है।

27. अहोई अष्टमी: यह व्रत दीपावली से ठीक एक सप्ताह पूर्व आता है। कहा जाता है इस व्रत को संतान वाली स्त्रियाँ करती हैं, जिसमें अहोई देवी के चित्र के साथ सेई और सेई के बच्चों के चित्र भी बनाकर पूजे जाते हैं।

28. धनतेरस: कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को ‘धनतेरस’ या ‘धनत्रयोदशीं’ के नाम से जाना जाता है। भगवान धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं, इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

29. नरक चतुर्दशी: नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं। इस दिन देवी अलक्ष्मी की पूजा की जाती है। एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था और 16,100 कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था।

30. दीपावली: दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है जो अक्टूबर या नवम्बर महीने में पड़ता है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यौहार है जैसे मंत्री समुदाय के बीच राजा। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस और नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली तथा दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा और भाईदूज। दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों ‘दीप’ अर्थात् ‘दिया’ व ‘आवली’ अर्थात् ‘पंक्ति’ या ‘श्रृंखला’ के मिश्रण से हुई है। उपनिषदों में कहा है – ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् हे भगवान! मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाइए। दीवाली यही चरितार्थ करती है।
देव दीवाली: सनातन धर्म में दीवाली की तरह ही ‘देव दीवाली’ भी को बेहद शुभ माना जाता है। यह पर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सभी देवी-देवता पृथ्वी पर वाराणसी के गंगाघाट पर स्नान करने आते हैं और भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं।

31. गोवर्धन पूजा: दीपावली से अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है। श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उँगली पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएँ उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। आठवें दिन श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के भोग खिलाए गए थे, तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा।

32. भाई दूज: भाई दूज, दीवाली के तीसरे दिन मनाया जाता है। यह त्यौहार बहनों और भाइयों के बीच प्रेम का प्रतीक है और दोनों के बीच स्नेह-बंधन को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।

33. देवोत्थान एकादशी: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को प्रबोधिनी या देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। यह चतुर्मास के अंत का प्रतीक है, इन चार महीने में भगवान विष्णु निंद्रा में होते है। चातुर्मास में हिन्दू धर्म में हिन्दू विवाह निषि( होता है।

34. क्रिसमस डे: क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह प्रतिवर्ष 25 दिसम्बर को मनाया जाता है।

35. लोहड़ी: यह त्यौहार पौष मास की अन्तिम रात्रि से मकर संक्रांति की सुबह तक मनाया जाता है। इस दिन वर्ष की सबसे लम्बी रात होती है, अगले दिन से धीरे-धीरे दिन बढ़ने लगते हैं।

36. मकर संक्रांति: यह त्यौहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। यह त्यौहार लोहड़ी के अगले दिन यानि पौष मास में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। मकर राशि में सूर्य के प्रवेश से दिन बड़े और रातें छोटी होती हैं तथा कर्क राशि में सूर्य के प्रवेश से दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगती हैं।

37. गणतन्त्र दिवस: गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है। इसे प्रतिवर्ष संविधान स्थापना दिवस के रूप में 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन 1950 में भारत सरकार ने ब्रिटिश सरकार के अधिनियम-1935 को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था।

38. बसंत पंचमी: माघ शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। इसी समय बसंत ऋतु का प्रारम्भ होता है। इसे ऋतुराज या मधुमास भी कहते हैं।इस दिन को देवी सरस्वती का जन्म दिन भी माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन विद्यालयों में भी देवी सरस्वती की आराधना की जाती है।

39. महाशिवरात्रि: शिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का पावन पर्व है। यह फाल्गुन मास में मनाया जाने वाला हिन्दुओं का पवित्र पर्व है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इस दिन को शिव रूपी पुरूष और पार्वती रूपी प्रकृति के मिलन का दिन भी माना जाता है।
पुराणों में चार प्रकार की शिवरात्रि का वर्णन है –
1. नित्य शिवरात्रि – प्रत्येक रात्रि।
2. मासिक शिवरात्रि – प्रत्येक मास की चर्तुदशी तिथि को।
3. प्रथम आदि शिवरात्रि – श्रावण मास की चर्तुदशी।
4. महाशिवरात्रि – फाल्गुन मास की चर्तुदशी।

40. होली: रंगों का त्यौहार के नाम से प्रसि( यह त्यौहार लगातार दो दिन तक समस्त भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पहले दिन होलिका पूजन किया जाता है एवं शाम को होलिका दहन किया जाता है। दूसरे दिन दुलहंडी मनाई जाती है जिसमें लोग एक-दूसरे को रंग गुलाल आदि लगाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाई बांटते हैं। यह त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस त्यौहार से सम्बन्धित भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप एवं होलिका की प्रसिद्ध कथा प्रचलित है।