मां लक्ष्मी का प्रतीक : शंख
समुद्र मंथन से उत्पन्न रत्नों में से एक शंख को विजय, समृद्धि, सुख-वैभव, शांति, यश-कीर्ति और माँ लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। देव-दानव संघर्ष के दौरान समुद्र मंथन के समय समुद्र से 14 अनमोल रत्नों की प्राप्ति हुई, जिनमें आठवें रत्न के रूप में शंख का जन्म हुआ। इसे भगवान विष्णु को समर्पित कर दिया गया, इसीलिए लक्ष्मी-विष्णु की पूजा में शंख ध्वनि अनिवार्य मानी जाती है। विष्णु पुराण के अनुसार माँ लक्ष्मी समुद्र की पुत्री हैं और शंख उनका भाई हैं। मान्यता है कि शंखनाद से सभी अदृश्य शत्रुओं का विनाश हो जाता है। इसलिए शंख को अनादि काल से धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ प्रयोजनों में शामिल किया जाता रहा है।
शिवलिंग और शालिग्राम की तरह शंख भी कई प्रकार के होते हैं। सभी तरह के शंख का महत्व और कार्य अलग-अलग होता है। प्रयोग के आधार पर शंख मूलतः तीन प्रकार के होते हैं- वामावर्ती, दक्षिणावर्ती और मध्यावर्ती। तीनों का महत्व शास्त्रों में वर्णित है। शंख को नाद का प्रतीक माना गया है, इसीलिए युद्ध के आरंभ और अंत में शंख ध्वनि का प्रयोग किया जाता था। श्रीकृष्ण के पास पांचजन्य, युधिष्ठिर के पास अनंत विजय, अर्जुन के पास देवदत्त, भीम के पास पुंडक, नकुल के पास सुगोष और सहदेव के पास महीपुष्पक शंख था, जिसकी शक्ति अलग-अलग थी। विष्णु के प्रिय माह पुरुषोत्तम मास में शंख ध्वनि करने वाला मृत्यु उपरांत विष्णुलोक में परमपद पाता है। शिव पूजा में शंख वर्जित माना गया है।
हिन्दू धर्म में पूजा स्थल पर शंख रखने की परंपरा है क्योंकि शंख को सनातन धर्म का प्रतीक माना जाता है। घर में पूजास्थल पर प्रतिदिन शुभ मुहूर्त में इसकी धूप दीप से पूजा की जाए तो वास्तु दोष का प्रभाव कम हो जाता है। शंख में रखे गाय के दूध का छिड़काव करने से घर में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। हिन्दू धर्म में शंख का महत्त्व अनादि काल से चला आ रहा है। शंख का स्पर्श पाकर साधारण जल भी गंगाजल के सदृश पवित्र हो जाता है। मन्दिर में शंख में जल भरकर भगवान की आरती की जाती है। आरती के बाद शंख का जल भक्तों पर छिड़का जाता है, जिससे वह प्रसन्न होते हैं। सनातन धर्म की कई ऐसी बातें हैं, जो न केवल आध्यात्मिक रूप से, बल्कि कई दूसरे तरह से भी फायदेमंद हैं। शंख रखने, बजाने व इसके जल का उचित इस्तेमाल करने से कई तरह के लाभ होते हैं। कई फायदे तो सीधे तौर पर सेहत से जुड़े हैं।
पूजा में शंख बजाने के लाभ :
⁜ हिन्दू मन्दिरों के पूजाघर में शंख अवश्य रखते हैं और इसे नियमति रूप से बजाते हैं।
⁜ जिस घर में शंख होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है क्योंकि शंख को लक्ष्मी का भाई बताया गया है।
⁜ माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु, दोनों ही अपने हाथों में इसे धारण करते हैं।
⁜ शंख बजाने से वातावरण पवित्र होता है। इसकी आवाज से मन में सकारात्मक विचार पैदा होते हैं।
⁜ शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं का नाश हो जाता है।
⁜ आयुर्वेद के मुताबिक शंखोदक की भस्म से पथरी, पीलिया आदि पेट की बीमारियां दूर होती हैं।
⁜ यदि श्वास का रोगी नियमित तौर पर शंख बजाए, तो वह बीमारी से मुक्त हो सकता है।
⁜ शंख में कैल्शियम, फास्फोरस व गंधक के गुण होने की वजह से, दांतों के लिए भी लाभदायक है।
⁜ शंख में रखे पानी का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं।
⁜ वास्तुशास्त्र के मुताबिक शंख की आवाज से घर में पाॅजिटिव एनर्जी जाग्रत होकर शुभ फल देती है।