चाणक्य नीति की श्रेष्ठ बातें
प्राचीन नीति शास्त्रों की परम्परा में, आचार्य चणक के पुत्र विष्णुगुप्त चाणक्य की ‘चाणक्य नीति’ का स्थान सर्वोपरि है। चाणक्य का समय 326 ई.पू. माना जाता है। महान नीतिज्ञ चाणक्य का जन्म 375 ई.पू. तक्षशीला (वर्तमान पाकिस्तानी पंजाब) में कुटिल नामक ब्राह्मण वंश में हुआ था। एक कुशल शासक द्वारा युद्ध, अकाल और महामारी के समय राज्य प्रबंधन किस प्रकार किया जाए, इन नियमों को चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता है। महापंडित आचार्य चाणक्य की ‘चाणक्य नीति’ में कुल सत्रह अध्याय है। सदियों बाद आज भी चाणक्य द्वारा बताए गए सिद्धांत और नीतियाँ प्रासंगिक हैं तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्ययन, चिंतन और अनुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह निःस्वार्थ होकर मानव कल्याण के उद्देश्य से अभिव्यक्त किया।
चाणक्य, कर्तव्य की वेदी पर मन की मधुर भावनाओं की बली देने वाले धैर्यमूर्ति थे। उन्होंने अपनी दूरदर्शी सोच से, विस्तृत योजना बनाकर, देश को एकसूत्र में बाँधने का साहसिक प्रयास किया। चाणक्य का मानना है कि वही गृहस्थी सुखी है, जिसकी संतान आज्ञा पालन करती है। इसी प्रकार ऐसा व्यक्ति मित्र नहीं कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास ना किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो।
⁜ तीनों लोकों के स्वामी सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु को नमन करते हुए मैं नीति शास्त्र के सिद्धांतों को कहता हूँ। मै यह सूत्र अनेक शास्त्रों का आधार लेकर कह रहा हूँ – चाणक्य।
⁜जो व्यक्ति शास्त्रों के सूत्रों का अभ्यास करके ज्ञान ग्रहण करेगा, उसे अत्यंत वैभवशाली कर्तव्य के सिद्धांत ज्ञात होगे। उसे इस बात का पता चलेगा कि किन बातों का अनुसरण करना चाहिए और किसका नहीं। उसे अच्छाई और बुराई का भी ज्ञात होगा और अंततः उसे सर्वोत्तम का भी ज्ञान होगा।
⁜ एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है यदि वह किसी मुर्ख को उपदेश देता है, यदि वह एक दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करता है या किसी दुखी व्यक्ति के साथ अत्यंत घनिष्ठ सम्बन्ध बना लेता है।
⁜ उस देश में निवास न करें जहां आपकी कोई इज्जत नहीं हो, जहां आप रोजगार नहीं कमा सकते, जहां आपका कोई मित्र नहीं और जहां आप कोई ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते।
⁜ व्यक्ति को आने वाली मुसीबतों से निबटने के लिए धन संचय करना चाहिए। उसे धन-सम्पदा त्यागकर भी पत्नी की सुरक्षा करनी चाहिए। लेकिन यदि आत्मा की सुरक्षा की बात आती है तो उसे धन और पत्नी दोनों को तुच्छ समझना चाहिए।
⁜ व्यक्ति को अपना भविष्य सुरक्षित रखने के लिए धन एकत्रित करना चाहिए। ऐसा ना सोचें की धनवान व्यक्ति को मुसीबत कैसी? क्योंकि जब धन साथ छोड़ता है तो संचित धन भी तेजी से घटने लगता है।
⁜ धन की तीन गति बताई गई हैं – दान, भोग और नाश। जो व्यक्ति ना तो धन का दान करता है और ना ही परिवार पर खर्च करता है, उसका धन अवश्य ही नष्ट हो जाता है। ऐसा ही विद्वानों का भी कथन है – दान-धर्म करते नहीं, करैं भजन में ढील, उनके धन को खाएंगे, वैश्या, वैद्य, वकील।
⁜ आठ गुणों से युक्त व्यक्ति की प्रशंसा होती है- बुद्धिमान, कुलीनता, मन का संयम, ज्ञान, बहादुरी, कम बोलना, दान देना और दूसरे के उपकार को याद रखना। इनका विशेष ध्यान रखना चाहिए।
⁜संसार में एक स्त्री के नौ रूप माने गए हैं- पुत्री, सखी, सुन्दरी, पत्नी, गर्भिणी, माता, तपस्विनी, संकट हरणी और अन्नपूर्णा। स्त्री का प्रत्येक रूप परम आदरणीय और पूजनीय है।
⁜ झूठ बोलना, छल करना, बेवकूफी करना, लालच करना, अपवित्रता और निर्दयता यह औरतों के नैसर्गिक दुर्गुण है। इनसे घर की सुख-समृद्धि का नाश होता है। अतः इनसे बचना चाहिए।
⁜ पुत्र वही है जो पिता का कहना मानता हो, पिता वही है जो पुत्रों का पालन-पोषण करे, मित्र वही है जिस पर आप विश्वास कर सकते हों और पत्नी वही है जिससे सुख प्राप्त हो।
⁜ लाड-प्यार से बच्चों में गलत आदतें पलती हैं, उन्हें शिक्षा देने से वह अच्छी आदतें सीखते हैं। इसलिए बच्चों को ज्यादा लाड़ ना करें, बल्कि जरुरत पड़ने पर दण्डित भी अवश्य करें।
⁜ पांच साल तक पुत्र को लाड़ एवं प्यार से पालन करना चाहिए, दस साल तक उसे छड़ी की मार से डराए। लेकिन जब वह 16 साल का हो जाए तो उससे मित्र के समान व्यवहार करे।
⁜ ऐसे अनेक पुत्र किस काम के जो दुःख और निराशा पैदा करे। इससे तो वह एक ही पुत्र अच्छा है जो सम्पूर्ण घर को सहारा और शांति प्रदान करे।
⁜ एक बुरे मित्र पर तो कभी विश्वास ना करें, एक अच्छे मित्र पर भी विश्वास ना करें। क्योंकि यदि ऐसे लोग आपसे रुष्ट होते है तो आपके सभी राज से पर्दा खोल देंगे।
⁜ एक ब्राह्मण का बल उसके तेज और विद्या में है, एक राजा का बल उसकी सेना में है, एक वैश्य का बल उसकी दौलत में तथा एक शुद्र का बल उसकी सेवा परायणता में होता है।
⁜ लड़की का विवाह उत्तम खानदान में करना चाहिए। पुत्र को उत्तम शिक्षा देनी चाहिए, शत्रु को आपत्ति और कष्टों में डालना चाहिए एवं मित्रों को धर्म-कर्म में लगाना चाहिए।
⁜ मूर्खों के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए, उन्हें त्याग देना ही उचित है, क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से वह दो पैरों वाले पशु के सामान होते हैं, जो अपने धारदार वचनों से वैसे ही हदय को छलनी करते है जैसे अदृश्य काँटा शरीर में घुसकर छलनी करता है।
⁜ कोयल की सुन्दरता उसके गायन में है। स्त्री की सुन्दरता उसके अपने परिवार के प्रति समर्पण में है। बदसूरत आदमी की सुन्दरता उसके ज्ञान में तथा तपस्वी की सुन्दरता उसकी क्षमाशीलता है।
⁜ जब तक आपका शरीर स्वस्थ है और आपके नियंत्रण में है उसी समय आत्म-साक्षात्कार का उपाय कर लेना चाहिए। क्योंकि मृत्यु हो जाने के बाद कोई कुछ नहीं कर सकता है।
⁜ विद्या अर्जन करना यह एक कामधेनु के समान है जो हर मौसम में अमृत प्रदान करती है। वह विदेश में माता के समान रक्षक एवं हितकारी होती है, इसीलिए विद्या को एक गुप्त धन कहा जाता है।
⁜ वह गाय किस काम की जो ना तो दूध देती है और ना तो बच्चे को जन्म दे सकती है। जैसे उस बच्चे का जन्म किस काम का जो ना ही विद्वान हुआ, ना ही भगवान् का भक्त हुआ।
⁜ ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए, दूसरे लोगों को ब्राह्मणों की पूजा करनी चाहिए। पत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए तथा घर आए अतिथि की सभी को पूजा करनी।
⁜ जो वैदिक ज्ञान की निंदा करते है, शास्त्र सम्मत जीवनशैली का मजाक उड़ाते है, शांतीपूर्ण स्वभाव के लोगों का मजाक उड़ाते है, वह अन्त समय में महान दुःख को प्राप्त होते हैं।
⁜ जब आप सफर पर जाते हो तो विद्यार्जन ही आपका मित्र है, घर में पत्नी मित्र है, बीमार होने पर दवा मित्र है, अर्जित पुण्य मृत्यु के बाद एकमात्र मित्र है।
⁜ अपने व्यवहार में बहुत सीधे ना रहें। यदि आप वन जाकर देखें हैं तो पायेंगे कि जो पेड़ सीधे उगे थे, उन्हें काट लिया गया और जो पेड़ आड़े-तिरछे थे वो खड़े हैं।
⁜ किसी दूसरे राजा के पैर छूने से उसको नागरिकों के पाप लगते हैं। राजा के यहाँ काम करने वाले पुजारी को राजा के पाप लगते हैं। पुरुष को औरत के पाप लगते हैं। गुरु को उसके शिष्यों के पाप लगते हैं।
⁜ इन सब को आपनी माता समझें …
⁕ राजा की पत्नी ⁕ पिता की माँ ⁕ गुरु की पत्नी
⁕ पत्नी की माँ ⁕ बड़े भाई अथवा मित्र की पत्नी
⁜ अच्छा मित्र वही है जो हमे निम्नलिखित परिस्थितियों में आवश्यकता पड़ने पर नहीं त्यागे:
⁕ किसी दुर्घटना पड़ने पर, ⁕ जब अकाल पड़ा हो,
⁕ जब युद्ध चल रहा हो, ⁕ जब राजा के दरबार मे जाना पड़े और
⁕ जब श्मशान घाट जाना पड़े।
⁜ जिसने आपको जन्म दिया उसके अतिरिक्त यह सब आपके पिता तुल्य हैं …
⁕ जिसने आपका यज्ञोपवित संस्कार किया ⁕ जिसने आपको पढ़ाया
⁕ जिसने आपका पालन-पोषण किया ⁕ जिसने आपको भयपूर्ण परिस्थितियों में बचाया
⁜ मुर्गे से यह तीन बातें सीखें …
⁕ सही समय पर उठना, ⁕ मेहनत से रोजगार प्राप्त करना
⁕ रिश्तेदारों में संपत्ति का उचित बंटवारा करना
⁜ कुत्ते से यह तीन बाते सीखे …
⁕ अपने स्वामी के प्रति बेहिचक ईमानदारी रखे
⁕ गाढ़ी नींद में हो तो भी एक क्षण में उठ जाए
⁕ बहुत भूख हो पर खाने को कुछ ना मिले या कम मिले तो भी संतोष करे
⁜ गधे से यह तीन बाते सीखे …
⁕ अपना बोझा ढोना ना छोड़े, ⁕ सर्दी-गर्मी की चिंता ना करे, ⁕ सदा संतुष्ट रहे
⁜ इन सात को जगा दें यदि यह सो जाएं …
1. विद्यार्थी 2. सेवक 3. पथिक 4. भूखा आदमी 5. डरा हुआ आदमी 6. पहरेदार 7. खजांची।
⁜ इन सात को सोते हुए जगाना नहीं चाहिए …
1. राजा 2. शेर 3. सांप 4. डंक मारने वाला कीड़ा 5. छोटा बच्चा 6. दुसरों का कुत्ता 7. मुर्ख व्यक्ति।
⁜ लालची आदमी को वस्तु भेंट देकर संतुष्ट करें। कठोर आदमी को हाथ जोड़कर संतुष्ट करें। मुर्ख व्यक्ति को सम्मान देकर संतुष्ट करें और विद्वान् आदमी को सच बोलकर संतुष्ट करें।
⁜ जो व्यक्ति आर्थिक व्यवहार करने में, ज्ञान अर्जन करने में, भोजन करने में और काम-धंधा करने में शर्माता नहीं है, वो व्यक्ति सदा सुखी रहता है।
⁜ एक अनपढ़ आदमी की जिन्दगी किसी कुत्ते की पूंछ की तरह बेकार है, जो ना उसकी इज्जत ही ढकती है और ना ही कीड़े मक्खियों को भागने के काम आती है।
⁜ जिस प्रकार एक फूल में खुशबू है, तिल में तेल है, लकड़ी में अग्नि है, दूध में घी है, गन्ने में गुड़ है, उसी प्रकार ज्ञानी व्यक्ति हर व्यक्ति में परमात्मा देखता है।
⁜ यदि ज्ञान को उपयोग में ना लाया जाए तो नष्ट हो जाता है। आदमी अज्ञानी है तो खो जाता है। सेनापति के बिना सेना खो जाती है। पति के विश्वास के बिना पत्नी खो जाती है।
⁜ वह आदमी बड़ा अभागा है जो बुढ़ापे में पत्नी की मृत्यु देखता है। जो जीते जी अपनी सम्पदा संबंधियों को सौप देता है। वह और भी अभागा है जो खाने के लिए दूसरों पर निर्भर है।
⁜ गरीबी पर धैर्य से मात करें, पुराने वस्त्रों को स्वच्छ रखें, बासी अन्न को गरम करें, अपनी कुरूपता पर अपने अच्छे व्यवहार से मात करें।
⁜ जो व्यक्ति अपने समाज को छोड़कर दूसरे समाज में जा मिलता है, वह उस राजा की तरह नष्ट हो जाता है जो अपना राज्य अपने मंत्रियों के हवाले कर देता है।
⁜ वह गृहस्थ भगवान् की कृपा को पा चुका है
⁕ जिसके घर में आनंददायी वातावरण है। जिसके बच्चे गुणी है।
⁕ जिसकी पत्नी मधुर वाणी बोलती है।
⁕ जिसके पास अपनी जरूरतें पूरा करने के लिए पर्याप्त धन है।
⁕ जो अपनी पत्नी से सुखपूर्ण सम्बन्ध रखता है।
⁕ जिसके नौकर उसका कहना मानते है।
⁕ जिसके घर में मेहमान का स्वागत किया जाता है।
⁕ जिसके घर में हर रोज भगवान की पूजा होती है।
⁕ जहां स्वाद भरा भोजन और पान किया जाता है।
⁕ जिसे भगवान् के भक्तों की संगती में आनंद आता है।
⁜ इस दुनिया में वह लोग सुखी हैं, जो अपने संबंधियों के प्रति उदार है। अनजान लोगों के प्रति सहृदय है। अच्छे लोगों के प्रति प्रेम भाव रखते है। नीच लोगों से धूर्तता पूर्ण व्यवहार करते हैं। विद्वानों से कुछ नहीं छुपाते। दुश्मनों के सामने साहस दिखाते है। बड़ों के प्रति विनम्र और पत्नी के प्रति सख्त है।
⁜ वह घर जहां ब्राह्मणों के चरण कमल को धोया नहीं जाता, जहां वैदिक मंत्रो का जोर से उच्चारण नहीं होता और जहा भगवान और पित्तरों को भोग नहीं लगाया जाता, वह घर एक श्मशान है।
म् सत्य मेरी माता है, अध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है, धर्माचरण मेरा बंधू है, दया मेरा मित्र है, भीतर की शांति मेरी पत्नी है, क्षमा मेरा पुत्र है, मेरे परिवार में यह छह लोग है।
⁜ हम उसके लिए ना पछताए जो बीत गया। हम भविष्य की चिंता भी ना करें। विवेक बुद्धि रखने वाले लोग केवल वर्तमान में जीते हैं।
⁜ जो भविष्य के लिए तैयार है और जो किसी भी परिस्थिति को चतुराई से निपटता है, यह दोनों व्यक्ति सुखी है। लेकिन जो आदमी सिर्फ नसीब के सहारे चलता है वह बर्बाद हो जाता है।
⁜ यदि आदमी उपकरण का सहारा ले तो गर्भजल से पानी निकाल सकता है। उसी तरह यदि विद्यार्थी अपने गुरु की सेवा करे तो गुरु के पास जो ज्ञान निधि है उसे प्राप्त करता है।
⁜ इस धरती पर अन्न, जल और मीठे वचन यह असली रत्न हैं। मूर्खों को पत्थर के टुकड़े रत्न लगते हैं।
⁜ यदि हम किसी से कुछ पाना चाहते है तो उससे ऐसे शब्द बोलें जिससे वह प्रसन्न हो जाए। उसी प्रकार जैसे एक शिकारी मधुर गीत गाता है, जब वह हिरण पर बाण चलाना चाहता है।
⁜ जो गंदे कपड़े पहनता है, जिसके दांत साफ नहीं, बहुत ज्यादा खाता है, कठोर शब्द बोलता है और सूर्योदय के बाद उठता है, उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्त्व क्यों न हो, वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रहता है।
⁜ एक व्यक्ति को वेद और शास्त्रों का ज्ञान है, लेकिन यदि उसे अपनी आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उस चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया तो है लेकिन कभी किसी का स्वाद नहीं चखा।
⁜ बेइज्जत होकर जीने से अच्छा है कि मर जाए। मरने में एक क्षण का दुःख होता है पर बेइज्जत होकर जीने में हर रोज दुःख उठाना पड़ता है।