दिनचर्या कैसी होनी चाहिए
एक बेहतर दिनचर्या सफल व्यक्ति के जीवन की मुख्य निशानी होती है। दिनचर्या ऐसी होनी चाहिए जिससे हमारा जीवन स्वस्थ और सुखी बन सके। अगर दिनचर्या नियमित होगी तो हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा और अगर शरीर स्वस्थ होगा तो उसका असर हमारे व्यवहार, सोच और प्रगति पर पड़ेगा, जिससे हमारी सफलता का रास्ता साफ होगा। लेकिन इसके विपरीत अगर हम रात को देर तक जागेंगे और सुबह देर से उठेंगे तो हमारे सभी काम में देरी होगी। शरीर में आलस होगा, दिमाग फ्रेश नहीं रहेगा और हमारा किसी काम में पूरी तरह मन नहीं लगेगा। ऐसी दिनचर्या से सफलता के सभी दरवाजे बंद होते दिखाई देंगे।
-: दिनचर्या के नियम :–
सुबह जल्दी उठें : बेहतर स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में यानी प्रातः 4 से 5.30 के बीच उठ जाना चाहिए। इससे कई आवश्यक काम पूरे करने के लिए अतिरिक्त समय भी मिलेगा और शरीर को सुबह के स्वच्छ वातावरण का लाभ भी मिलेगा। इसके अलावा रात में सोने से पहले ताम्बे के बर्तन में पानी भरकर रखें और सुबह उठकर उस पानी को पियें। इससे पेट साफ होने में आसानी होगी, शरीर में ताजगी बनी रहेगी और शरीर ऊर्जावान रहेगा। सुबह अगर बेहतर होगी तो पूरा दिन अच्छा गुजरेगा।
व्यायाम और योग करें : व्यायाम हमारे जीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए नियमित रूप से सुबह शौच के पश्चात् व्यायाम और योग अवश्य करें। इससे ना सिर्फ शरीर ऊर्जा से भरपूर रहेगा, बल्कि दिमाग और मन भी शांत रहेगा। नियमपूर्वक व्यायाम और योग करने से कई बड़ी बिमारियों से मुक्ति मिलती है।
प्रतिदिन स्नान करें : स्नान करने से शरीर की बाहरी गंदगी दूर होती है, शरीर में ताजगी आती है और रक्त संचार सुचारु रहता है। स्नान से तनाव, थकान और दर्द मिटता है तथा पवित्रता आती है। स्नान के पश्चात मनुष्य की जठराग्नि प्रबल होती है और भूख भी अच्छी लगती है। स्नान के लिए हमेशा ताजा पानी का इस्तेमाल करें। सर्दियों के मौसम में पानी थोड़ा गर्म कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें ज्यादा गर्म पानी इस्तेमाल ना करें, वरना इससे त्वचा से सम्बंधित कई रोग हो सकते हैं। स्नान के सात प्रकार है – मंत्र, भौम, अग्नि, वायव्य, दिव्य, वरुण और शारीरिक।
भगवान का ध्यान : सुबह स्नान करने के बाद कुछ समय पूजा पाठ के लिए जरूर निकालें, इससे मन शांत रहेगा और सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी। किसी भी धार्मिक व्यक्ति के जीवन में पूजा का बहुत अधिक महत्व होता है। धर्मक्षेत्र के साथ कर्मक्षेत्र में भी पूजा का बहुत महत्व है इसलिये काम को भी लोग पूजा मानते हैं। पूजा करते समय अपना मन एकाग्रचित रखें और भक्ति में पूरा ध्यान लगाएं।
सुबह का नाश्ता : जीवन के लिए भोजन की उपयोगिता को समझना जरूरी है। सुबह के नाश्ते में पौष्टिक तत्त्वों को शामिल करें। इसमें फल, दूध, दही, दलिया, छाछ, जूस तथा अंकुरित अन्न की मात्रा अधिक हो तो आहार संतुलित हो जाता है। संतुलित आहार ही हमारे शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम होता है। गर्मियों में नाश्ता किए बिना घर से बाहर ना निकलें।
दोपहर का भोजन : दोपहर का भोजन पेट भरकर करें, लेकिन ज्यादा ना खाएं वरना दिनभर आलस बना रहेगा। सुबह का नाश्ता यदि 8 बजे करते हैं तो दोपहर का भोजन करीब 1 बजे करें। दोपहर के भोजन के बाद चाहें तो 20-30 मिनट के लिए थोड़ा आराम कर सकते हैं, लेकिन ज्यादा समय तक नहीं। भोजन के पूर्व जल का सेवन करना उत्तम, मध्य में मध्यम और भोजन पश्चात् निम्नतम माना गया है।
रात का भोजन : रात का भोजन भरपेट ना करें क्योंकि रात को खाने के बाद हम सो जाते है। ऐसे में शरीरिक श्रम ना होने से पेट आसानी से खाना नहीं पचा पाता और मोटापा जैसी समस्या हो जाती है। रात को खाने के तुरंत बाद सोने ना जाएँ, बल्कि पहले थोड़ा टहलें ताकि खाना आसानी से पच सके। रात को आधे भूखे ना सो सकें तो दूध पी सकते हैं। दूध में सभी आवश्यक पौष्टिक तत्त्व होते हैं। एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है- सुबह का नाश्ता स्वयं खाओ, दोपहर का भोजन दूसरों को देकर खाओ और रात का खाना दुश्मन को भी ना दो।
रात को समय पर सोएं : बेहतर स्वास्थ्य के लिए भरपूर नींद बेहद आवश्यक है, इसके लिए रात को जल्दी सोएं। वयस्क व्यक्तियों को रात में करीब 8 घंटे जरूर सोना चाहिए जबकि वृद्ध व्यक्तियों के लिए करीब 5-6 घंटे की नींद पर्याप्त होती है। बच्चों को रात में 8-10 घंटे की नींद लेनी चाहिए।
भरपूर पानी पिएं : स्वस्थ शरीर के लिए पर्याप्त पानी बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी से कई तरह के रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इसलिए पूरे दिन में कम से कम 8 गिलास ताजा पानी जरूर पियें। पीने का पानी साफ होना चाहिए। ध्यान रखें कभी भी खड़े-खड़े पानी ना पिएं। पानी हमेशा गिलास या लौटे से घूंट घूंट करके पीना चाहिए। खाना खाने से आधा घंटा पहले या एक घंटा बाद पानी पीएं।
सकारात्मक सोच रखें : सफल जीवन के लिए एक बेहतर दिनचर्या के साथ सकारात्मक सोच भी बेहद जरुरी है। हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक बनायें क्योंकि नकारात्मकता से हम सही फैसले नहीं ले पाते और सफलता से दूर होते जाते हैं। इसके लिए महापुरुषों की जीवनियां पढ़ें।
नशीले पदार्थों का सेवन ना करें : अच्छे स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार लें और किसी भी तरह के नशीले पदार्थों का सेवन ना करें। इनसे शरीर पर बहुत बुरे प्रभाव पड़ते हैं; साथ ही इनका सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है; जिससे हम सही निर्णय लेने में असक्षम हो जाते है। नशीले पदार्थ कभी हमे तरक्की की राह पर नहीं ले जा सकतेऋ इनके सेवन से हम अपनी जिंदगी खराब करते हैं और सफलता से कोसों दूर हो जाते हैं।
उम्मीद है आपको यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी। विद्यार्थियों को टाइम टेबल या दिनचर्या बनाते वक्त निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए :
1. खाने और सोने का समय निश्चित होना चाहिए, क्योंकि उसके बिना और कोई काम नहीं हो पायेगा।
2. आपके दोस्तों और घरवालों को आपके टाइम टेबल के बारे में पता होना चाहिए ताकि वो आपको डिस्टर्ब ना कर सकें।
3. बच्चों के होमवर्क और पढ़ाई के लिए अलग से समय होना चाहिए। कुछ समय एक्सरसाइज और खेलों के लिए भी निकालें।
4. चाहे कितनी भी व्यस्तता हो, कुछ समय अपने परिवार लिए भी निर्धारित होना चाहिए। अर्थात् घरेलू कामों में माता-पिता की सहायता अवश्य करें।
5. टाइम टेबल फ्लेक्सिबल होना चाहिए ताकि अचानक से आये प्रोजेक्ट्स या किसी एक्जाम के लिए भी समय निकल सकें।
6. समय-समय पर देखते रहें कि यह टाइम टेबल आपके लिए काम कर रहा है या नहीं। वरना जरूरी फेर-बदल के लिए हमेशा तैयार रहें।