प्रतिदिन पूजन में प्रयोग होने वाली कई वस्तुएं होती हैं, उन्हीं में से एक घंटी होती है। आपने मंदिर या घर के पूजा घर में भी गरुड़ घंटी को अवश्य देखा होगा। घंटी विशेष प्रकार का नाद होता है जो आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है। मंदिर के द्वार, आंगन और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। लेकिन हम इन चीजों का प्रयोग सही तरीके से करते हैं या नहीं यह हमें सोचना चाहिए और इनको शास्त्रोक्त तथ्यों से समझना भी चाहिए। गरुड़ घंटी को हिंदू धर्म में बहुत अधिक पवित्र माना गया है।

बाजार में कई प्रकार की घंटी मिलती हैं। भगवान विष्णु की पूजा में गरुड़ वाली घंटी ही बजानी चाहिए। भगवान विष्णु कहते हैं कि जो गरुड़ चिन्ह से युक्त घंटी हाथ में लेकर मेरी पूजा, आरती करता है उसके कई जन्मों के पापों का विनाश हो जाता है। गरुड़ को भगवान विष्णु का वाहन और द्वारपाल भी माना जाता है। अधिकतर मन्दिर के बाहर आपको द्वार पर गरुड़ भगवान की मूर्ति मिलेगी। इसलिए जो व्यक्ति प्रतिदिन नहाने के बाद सुबह आरती के समय इसे बजाता है तो उसके जीवन में इसका बहुत शुभ प्रभाव पड़ता है। इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न रहती है और अपनी कृपा उस घर पर हमेशा बनाए रखती है। सभी मंदिरों में अक्सर इसे देखा जा सकता है।

मन्दिर या पूजा घर में मिलने वाली घंटियां 4 प्रकार की होती हैं –

1. गरुड़ घंटी : गरुड़ घंटी छोटी-सी होती है जिसे एक हाथ से बजाया जा सकता है।
2. द्वार घंटी : यह मंदिर के मुख्य द्वार पर लगी रहती है। यह बड़ी और छोटी अनेक प्रकार की होती है।
3. हाथ घंटी : पीतल की ठोस एक गोल प्लेट की तरह होती है जिसको लकड़ी की छड़ से बजाते हैं।
4. घंटा : यह करीब 5 फुट ऊँचा और 5 फुट चैड़ा होता है, इसकी आवाज काफी दूर तक सुनाई देती है।

पूजा में घंटी बजाने के लाभ :

पुराणों के अनुसार सृष्टि की रचना में ध्वनि का महत्वपूर्ण योगदान माना गया है। ध्वनि से प्रकाश और प्रकाश रूपी बिंदु से जीव की उत्पत्ति का सिद्धान्त हिंदू धर्म में ही है।
प्रारंभ में जो नाद उत्पन्न हुआ था, घंटी की ध्वनि को उसी नाद का प्रतीक माना जाता है। ओंकार (ॐ) के उच्चारण से भी यही नाद जाग्रत होता है।
जिन स्थानों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती है वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। वातावरण में मौजूद जीवाणु और सूक्ष्म विषाणु घंटी की आवाज से मर जाते हैं।
घर में पूजा के समय घंटी बजाने से नकारात्मक शक्तियां हटती हैं और समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
भगवान को स्नान कराते समय, धूप-दीप अर्पण करते समय, नैवेद्य अर्पण करते समय, वस्त्र, अलंकार पहनाते समय और भगवान की आरती करते समय हमें घंटी अवश्य बजाना चाहिए।
देवताओं की पूजा-साधना में कोई अवरोध ना पहुंचे इसलिए हमें सदैव नित्य पूजा में घंटी बजानी चाहिए।
स्कंद पुराण के अनुसार मंदिर में घंटी बजाने से मानव के सौ जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और यह भी कहा जाता है कि घंटी बजाने से देवताओं के समक्ष आपकी हाजिरी लग जाती है।
शनिवार या मंगलवार के दिन पीतल की घंटी किसी मंदिर में दान करने से आपकी सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी और आपके रूके काम भी बनने लगेंगे।
घंटी की आवाज से मनुष्य का शरीर बहुत रिलैक्स महसूस करता है। घंटी या घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जब प्रलयकाल आएगा तब भी इसी प्रकार का नाद प्रकट होगा।