माता-पिता का महत्त्व
प्रत्येक व्यक्ति को एक ऐसे साथी या मित्र की आवश्यकता होती है जो जीवन भर उसके साथ रहे और उसकी मदद करें। जीवन का यह सत्य है किसी भी प्रेम की तुलना में माता-पिता का प्रेम सबसे ऊपर होता है। इसीलिए परमात्मा ने व्यक्तित्त्व के विकास के लिए धरती पर माता-पिता की रचना की। एक पिता के सहज और निर्मल प्रेम की अन्य किसी के प्रेम से तुलना नहीं की जा सकती है। माता-पिता वह होते हैं जो अपनी संतान की खुशी के लिए हर दुख, हर तकलीफ हंसते-हंसते सहते हैं। चाहे बच्चे जितनी भी बुरी हरकतें करें, कभी भी माता-पिता के मन में उनके प्रति घृणा की भावना उत्पन्न नहीं होती है।
परमेश्वर की निश्छल भक्ति का अर्थ ही माँ है। कुपुत्र अनेक जन्मते हैं, पर कुमाता मिलना मुश्किल है। माता-पिता बिना किसी मोह माया के अपने बच्चों की परवरिश करते हैं। माता-पिता की सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती है। जिस संतान को माता-पिता की सेवा का अवसर मिले, तो समझ लीजिये वह बहुत भाग्यशाली है। माता-पिता की सेवा और उनकी आज्ञा पालन से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। पिता-पुत्र संबंधों का सबसे उदात्त स्वरूप राम और दशरथ के उदाहरण से मिलता है। हालांकि श्रवण को भी पितृभक्त माना जाता है किन्तु उसमें एक दोष था। वह माता-पिता से अधिक अपनी पत्नी की बात को ज्यादा महत्त्व देता था। यदि हम आज अपने माता-पिता का सम्मान करेंगे, तभी हमारी आने वाली पीढ़ी भी वही सब सीखेंगे। जो अपने माता-पिता की सेवा नहीं करता है और उनका अपमान करता है, उसे कभी भी जीवन में सुख-शांति प्राप्त नहीं होती है।
अच्छे माता-पिता के लक्षण :
माता-पिता बनना एक बहुत ही सुन्दर एहसास होता है। साथ ही माता पिता बनने पर हर व्यक्ति को जीवन पूर्ण लगता है। सही मायने में देखें तो यह जीवन का अंत नहीं एक नई शुरुआत होती है और जिम्मेदारियां भी बढती हैं। माता पिता बनने के बाद सबसे बड़ी बात होती है एक अच्छे माता पिता बनने की। आपके बच्चे चाहे छोटे हों या बड़े आपका कर्तव्य कभी भी खत्म नहीं होता है। आपको हमेशा एक अच्छे माता-पिता के रूप में बन कर रहना होगा और बच्चों का अच्छा ख्याल रखना होगा। आपको यह समझना होगा कि बच्चों को कैसे प्यार दें ताकि उन्हें मूल्यवान और अच्छा महसूस हो। उन्हें सिखाना होगा की क्या अच्छा है और क्या बुरा। साथ ही उनका विकास उत्साहित, स्वस्थ, तथा स्वतंत्र रूप से होना चाहिए।
1. अपने बच्चों के लिए समय निकालें : अपने बच्चों को अच्छे से समझने और उनके बेहतर भविष्य के लिए अपने बच्चों के लिए समय अवश्य निकालें। प्रतिदिन उनके साथ कुछ वक्त बिताने से आप अपने बच्चे को अच्छे से समझ सकते हैं और बच्चों को भी एहसास होता है कि उसके माता-पिता उनका ख्याल रखते हैं और उनसे प्यार करते हैं। बच्चों के साथ खेलना और उनका दोस्त बन कर रहना ही अच्छे माता-पिता का पहला कर्तव्य होता है। अपने बच्चों को उनकी पसंद का खेल चुनने दें और उनके साथ उस खेल को खेलें। इससे आपको अपने बच्चों को समझने में आसानी होती है और बच्चे को भी एहसास होता है कि आप उनकी सही में चिंता करते हैं।
2. अपने बच्चों को ढेर सारा प्यार दें : कभी-कभी बच्चों को ढेर सारा प्यार देने और उनसे लगाव रखने से ही वो खुश रहते हैं और उनका विकास अच्छे से होता है। अपने बच्चों को गले लगाने और प्यार से बातें करने से उनका मन भी शांत होता है और वो माता-पिता की बातों पर अच्छे से ध्यान देता हैं।
3. बच्चों के प्रेरणा स्रोत बनें : माता-पिता बच्चों के प्रेरणा स्रोत होते हैं और बच्चे उन्हीं से सब कुछ सीखते हैं। माता-पिता को बच्चों के सामने सोच-समझ कर बोलना चाहिए क्योंकि इससे बच्चों के दिमाग पर बहुत असर पड़ता है। इसीलिए बच्चों के समक्ष सही, सम्मानजनक, तथा अच्छा व्यवहार देना चाहिए।
4. बच्चों को हमेशा सच बताना चाहिए : जब कभी भी बच्चे आपसे कोई भी सवाल पूछें उसका जितना हो सके सही जवाब दें और सच बताएं। बच्चों का मन बहुत ही अलग प्रकार का होता है उन्हें आप जितना सही और सच बताएँगे वो भी उतना ही सच आपको और लोगों को बताएँगे। अगर उन्हें गलत और झूठ बताया जाये तो वो भी झूठे बन जाते हैं।
5. बच्चों को अनुशासन में रखें : माता-पिता को समझना होगा कि अनुशासन का मतलब हमेशा दंड या सजा नहीं होता है। गलती करने पर उन्हें पास बैठा कर क्या गलत है क्या सही समझाएं। बच्चों को बार-बार डांटने या सजा देने से उनके मन में डर बैठ जाता है जो उनके मानसिक विकास में बाधा डाल सकता है।
6. बच्चों की तुलना ना करें : इस दुनिया में हर एक इंसान या बच्चे की अपनी खूबी होती है। हर बच्चे में अलग खासियत होती है। कभी भी किसी भी बच्चे को दुसरे बच्चों के साथ तुलना ना करें क्योंकि इससे बच्चे अपनी पहचान और काबिलियत से दूर होने लगते हैं। बच्चों को हमेशा प्रेरित करें और कुछ गलती हो जाने पर समझाएं की क्या सही है और सफलता के लिए रास्ता क्या है? हर किसी बच्चे की अपनी दिलचस्पी होती है।
7. बच्चों को बच्चों की तरह मानें : कभी-कभी माता-पिता सोचते हैं कि बच्चे बड़े हो चुके हैं और उन्हें अब ज्यादा कुछ सिखाने बताने की आवश्यकता नहीं है। या कभी-कभी सोचते हैं बच्चे बड़े होने पर भी अच्छे से सिख नहीं रहे हैं और माता-पिता उन्हें बड़ा करने की जल्दबाजी में रहते हैं। याद रखें, बच्चों को बच्चों की तरह ही मानें उन्हें धीरे-धीरे मजे के साथ खेलते-कूदते बड़े होने दें।
8. बच्चों को हमेशा प्रोत्साहन दें : अगर आप बच्चों को हमेशा डर और डांटने के साथ बढ़ाएंगे तो, आप कैसे सोच सकते हैं कि वो खुशी और खुले मन के साथ बड़े होंगे। बच्चों को हमेशा प्रोत्साहन देने चाहिए ताकि वो आगे बढ़ें और निडरता के साथ हर चीज का सामना कर सकें। खुशी और प्रेमपूर्ण वातावरण रखने से बच्चे का विकास अच्छे से होता है। बच्चों पर कभी भी गुस्सा नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे उन पर बुरा असर पड़ता है। जब कभी भी बच्चे कोई गलती करते हैं तो उन्हें डाटने के बजाए शांति से समझाएं क्योंकि डांटने से कुछ बच्चे चिड़चिड़े, कुछ गुस्से वाले तो कुछ डर के तले दबे रह जाते हैं।
9. बच्चों के खाने पीने का ध्यान रखें : यह बहुत आवश्यक है कि बच्चे स्वच्छ और पोषक आहार खाएं। साथ ही उन्हें व्यायाम और खेलकूद में भी भाग लेना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर स्वस्थ रहता है। यह भी ध्यान रखें कि उन्हें रात्री के समय 6-8 घंटे अच्छे से सोने का समय मिले। उन्हें बाहर का खाना ज्यादा खाने को ना दें क्योंकि इससे कई प्रकार की बीमारियाँ होने का खतरा बना रहता है। समय-समय पर नए-नए व्यंजन बनाकर खिलाएं।
10. बच्चों की शिक्षा पर पूरा ध्यान दें : बच्चे कल के भविष्य हैं, इसलिए माता पिता को उनकी शिक्षा पर सौ प्रतिशत ध्यान देना चाहिए। सभी बच्चे चाहें वो लड़की हो या लड़का उन्हें पूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। शिक्षा ही वो माध्यम है जिसकी मदद से बच्चे आने वाले कल को आगे ले जायेंगे और देश को उन्नति दिलाएंगे।माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा पर पूर्ण ध्यान देते हैं वही अच्छे माता पिता होते हैं।
यह कुछ मुख्य बातें हैं जिनसे माता-पिता को एक अच्छे माता पिता बनने में बहुत मदद मिलती है। इनके अतिरिक्त अपने बच्चों के लिए वह सभी आवश्यक कार्य करें, जो आप उचित समझते हैं।