धर्म का मानव जीवन में अत्यधिक महत्व होता है। धर्म चेतना की पराकाष्ठा है। जीवन की कठिनाईयों से परेशान व दुखी होकर व्यक्ति धर्म से जुड़ता है। संसार में प्रत्येक व्यक्ति अपने आपको किसी न किसी धर्म अथवा संप्रदाय से जुड़ा हुआ बताता है। भारत में धर्म का पर्याय है- चिरन्तन सत्य। जहाँ दूसरे धर्मों का लक्ष्य केवल धार्मिक विकास है, वहीं सनातन हिन्दू धर्म में सत्, चित् और आनन्द अर्थात् सच्चिदानन्द की प्राप्ति है।

सिन्धु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थलों, हड़प्पा (पूर्वी पंजाब, पाकिस्तान), मोहनजोदड़ो (सिंध, पाकिस्तान), कालीबंगा (हनुमानगढ़, राजस्थान), लोथल (भाल, गुजरात), धोलावीरा (कच्छ, गुजरात), राखीगढ़ी (हिसार, हरियाणा) और भिरड़ाना (फतेहाबाद, हरियाणा) आदि स्थानों की खुदाई से हमें भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग से एक ऐसी विकसित सभ्यता का ज्ञान प्राप्त हुआ, जिसकी तुलना में तत्कालीन विश्व की अन्य प्राचीनतम सभ्यताएं अपने विकास के क्रम में बहुत पीछे थीं। सिन्धु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म के कई चिन्ह मिलते हैं, जिनमें अज्ञात मातृदेवी की मूर्तियाँ, शिव पशुपति जैसे देवता की मुद्राएँ, शिवलिंग, पीपल इत्यादि प्रमुख हैं। इसका विकास सिंधु नदी तथा प्राचीन सरस्वती नदी की घाटी में होने के कारण इसका नाम सिन्धु घाटी सभ्यता रखा गया। इसका विस्तार उत्तर भारत के राज्य हरियाणा, गुजरात, पंजाब, राजस्थान, पश्चिमी उत्तरप्रदेश तथा वर्तमान पाकिस्तान के बलूचिस्तान व सिंध प्रांत में होने के कारण यह सभ्यता हिन्दू धर्म की प्राचीनता की जीवंत गवाह है। यहाँ रहने वाले लोगों के लिये हिन्दू शब्द का प्रयोग होता था। अब तक इस सभ्यता के 1400 केन्द्रों को खोजा जा सका है, जिसमें से 925 केन्द्र भारत में है।

मनुस्मृति भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। भारत में वेदों के उपरान्त सर्वाधिक मान्यता और प्रचलन ‘मनुस्मृति’ का ही है। मनुस्मृति हिन्दू धर्म का एकमात्र प्राचीन धर्म ग्रन्थ है जो अंग्रेजी में अनुवादित (1776 में) किए जाने वाले पहले संस्कृत ग्रन्थों में से एक है। ब्रिटिश फिलाॅजिस्ट सर विलियम जाॅन्स द्वारा ब्रिटिश सरकार के उपयोग हेतू मनुस्मृति में अनुचित परिवर्तन करके हिन्दू कानूनों का निर्माण किया गया था। हिन्दूओं के प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रन्थ ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ में भी इसके श्लोक देखने को मिलते हैं। इसकी लिपिबद्ध रचना लगभग 200-250 ई.पू. मानी जाती है। विभिन्न भाषाओं के पुरुषवाचक शब्द मनुष्य, मैन, मनुज, मानव, एडम, आदमी आदि सभी शब्द मनु से प्रभावित है। इसमें 12 अध्याय और लगभग 2600 श्लोक हैं, जिनसे व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक संरचना के लिए प्रेरणा मिलती है। इसमें सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर, चारों वर्णों, चारों आश्रमों, सोलह संस्कारों तथा राज्य की व्यवस्था, राजा के कर्तव्य, सेना का प्रबन्ध, भांति-भांति के विवादों आदि उन सभी विषयों पर परामर्श दिया गया है जो कि मानव मात्र के जीवन में घटित होने सम्भव है। यह सब धर्म-व्यवस्था वेद पर आधारित है।

भारत में समय-समय पर शक, हुण, कुषाण, तुर्क, पठान, मुगल, अंग्रेज आदि अनेक विदेशी संस्कृतियों का आक्रमण होता रहा है। इससे हमारी संस्कृति एवं सभ्यता काफी प्रभावित हुई है। मुगलकाल में अत्यधिक मात्रा में (तक्षशीला, विक्रमशीला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों में) प्राचीन ग्रंथों को अग्नि में भस्मिसात किया गया। ब्रिटिश शासनकाल में भी भारतीय संस्कृति और साहित्य में बहुत से बदलाव किए गए और उन्हें जबरन मान्यताएं दी गई। धर्म के लालची ठेकेदारों ने भी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी। वर्तमान में उपलब्ध ग्रंथों में बहुत सारे अंश ऐसे हैं जो या तो मिथ्या हैं या उनका अर्थ बदलकर लिखा गया है। आजादी के बाद आने वाली सरकारों ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया कि इन ग्रन्थ-शास्त्रों में जो हेरफेर किया गया है, उन्हें ठीक किया जाए। आधुनिक विद्वानों का यह कर्तव्य बनता है कि वह धार्मिक ग्रंथों में की गई उन विसंगतियों को दूर करें जिनसे भ्रम या भ्रान्ति की स्थिति बनती है।

नोट- प्रस्तुत पुस्तक लिखने का मुख्य उद्देश्य पाठकों को हिन्दू धर्म के संस्कार एवं रीति-रिवाजों से सम्बन्धित जानकारी उपलब्ध करवाना है। अतः हिन्दू धर्म के सम्बन्ध में उत्पन्न होने वाले विवादों के निराकरण हेतू प्रस्तुत पुस्तक में पाठकों तक हिन्दू धर्म से सम्बन्धित आवश्यक सामान्य जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।