सदियों से भारत में नीम का उपयोग एक औषधि के रूप में किया जाता है। आज के समय में भी नीम की निंबोली, पत्ती व उसकी छाल से बहुत-सी आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाइयाँ बनती है। नीम का हर अंग फायदेमंद होता है, बहुत-सी बीमारियों का उपचार इससे किया जाता है। नीम की पत्तियां स्वाद में जितनी कड़वी होती है, सेहत के लिए उतनी ही फायदेमंद होती हैं। नीम स्वास्थ्यवर्धक एवं आरोग्यता प्रदान करने वाला है। यह सभी प्रकार के चर्म रोगों को हरने वाला है, इसे मृत्यु लोक का कल्पवृक्ष कहा जाता है।

नीम के बारे में कहा जाता है कि एक नीम और सौ हकीम दोनों बराबर है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में इसे ग्रामीण औषधालय का नाम भी दिया गया है। नीम के वृक्ष की ठण्डी छाया गर्मी से राहत देती है तो इसके पत्ते, फल-फूल, छाल का उपयोग विभिन्न रोगों में किया जाता है। आयुर्वेद में नीम को बहुत ही उपयोगी पेड़ माना गया है। नीम स्वास्थवर्धक एवं आरयोग्यता प्रदान करने वाला है।

नीम भारतीय मूल का वृक्ष है। घर में नीम का पेड़ लगाना शुभ माना जाता है। नीम एक चमत्कारी एवं प्रायः सर्वसुलभ वृक्ष माना जाता है और इसका हर अंग फायदेमंद होता है। यह सूखे से प्रभावित क्षेत्रों के छाया देने वाले वृक्षों में से एक है। यह किसी भी प्रकार के पानी मीठा या खारा में भी जीवित रहता है। इसकी छाल कठोर, विदरित (दरारयुक्त) या शल्कीय होती है और इसका रंग सफेद-धूसर या लाल, भूरा भी हो सकता है। इसके फूल सफेद और सुगन्धित होते हैं और गुच्छे के रूप में होते हैं। इसका फल चिकना व गोलाकार या अंडाकार होता है और इसे निंबोली कहते हैं। इसकी निंबोली और पत्तियों से निकाले गये तेल की मालिश शरीर के लिये अच्छी होती है। कहा जाता है कि जिस धरती पर नीम के पेड़ होते हैं, वहाँ मृत्यु और बीमारी कैसे हो सकती है।

नीम के गुण और उसके लाभ :

यह स्वाद में कड़वा होने के कारण मधुमेह रोग में भी अत्यधिक लाभकारी है।
इसका प्रयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
यह जीवाणु नाशक, रक्तशोधक एवं त्वचा विकारों के साथ बुखार में भी गुणकारी और लाभकारी है।
नीम की छाल का लेप से रक्त शुद्ध होता है। त्वचा की चेचक जैसी भयंकर बीमारियां नहीं होती।
नीम की दातुन से मसूढ़े मजबूत होते है और दांतों में कीड़ा नहीं लगता तथा मुंह से दुर्गंध नहीं आती।
नीम की पत्तियों को पानी में उबाल उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं।
नीम के बीजों के चूर्ण को खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में काफी फायदा होता है।
नीम की निम्बोली का चूर्ण बनाकर एक-दो ग्राम रात को गुनगुने पानी से लें कुछ दिनों तक नियमित प्रयोग करने से कब्ज रोग नहीं होता है एवं आंतें मजबूत बनती है।
बिच्छू के काटने पर नीम के पत्ते मसल कर काटे गये स्थान पर लगाने से जलन नहीं होती है और जहर का असर कम हो जाता है।
नीम के 25 ग्राम तेल में थोडा-सा कपूर मिलाकर रखें यह तेल फोडा-फुंसी, घाव आदि में उपयोग रहता है।
नीम के पत्ते जलाकर रात को धुआं करने से मच्छर नष्ट हो जाते हैं।